Saturday, 6 October 2007

कर्नाटक में नाटक

बीस माह पुराणी भाजपा और ज़द एस गंठबंधन का अकाल मौत आख़िर हो ही गया। इस गठबंधन के बनते समय और अब दोनो वक्त देवेगौरा ने एक कुशल अवसरवादी राजनीतीक निर्देशक की भूमिका निभाई। इस गठबंधन के बनते समय देवेगौरा ने अपने को अलग रखकर भाजपा से निकटता का दाग ना लगे , यह दिखाने की कोशिश की थी और अब जब बीस माह का ज़द एस का राजनीतिक सौदा का समय पुरा हो गया तो भाजपा को सत्ता सौंपने से इंकार कर अपने रंगीन चेहरे को सामने ला दिया। ऎसी अवसरवादी राजनीती लोकतंत्र के लिए कहीं से फायदेमंद नहीं है। कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा के कंधे पर सवार होकर सत्ता सुख भोगने की लिप्सा छोर देवेगौरा को सीधे जनता से मुखातिब होना चाहिऐ।

Friday, 28 September 2007

नई दुनिया मे आपका स्वागत है।


बेगुसराय के पत्रकारिता इतिहास मे ब्लोग लेखन की सक्रियता को देखकर मैं आकर्षित हुआ। यह मेरा पहला प्रयास है, आप बुध्हिजीवियों से अभ्यर्थना है कि मेरे प्रयास पर अपनी टिप्पणी अवश्य दें ।

आपके टिप्पणी के इंतज़ार में ........................................