Wednesday, 23 April 2008

अमेरिकी चुनाव

तो भाई भाडासिओं हिलेरी और ओबामा का टक्कर कैसा लग रहा है । बड़ा आश्चर्य हुआ की अब तक अपना भड़ास अमेरिकी चुनाव पर अपना थोड़ा सा भी भड़ास नहीं निकला । सोचा की आपुन से ही शुरू करूं................ आम लोगों को लगता होगा की जब एक ही पार्टी के white एंड ब्लैक की टक्कर हो रही है तो सचमुच में अमेरिका अब बंट जाएगा लेकिन इस मुगालते में कोई मत रहे की डेमोक्रेट के जित जाने से इराकी कत्ले आम रुक जाएगा या भारत को विदेश निति पर नसीहत देने की आदत छुट जायेगी । दुनिया वालों जरा देखो की अपने दलीय चुनाव में जीतने के लिए जिस तरह सुगर के लीड की तरह का आरोप का सहारा लिया जाता है तो तीसरी दुनिया के भइया लोगों आपको हांकने के लिए कुछ भी किया जायेगा। बड़ा सुकून वाला ख़बर आजकल चल रहा है की अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कालाजार होने वाला है जबकि भारत सहित तीसरी दुनिया के देशों को अभी तक सिर्फ़ छींक ही आए है वो भी ठीक होने वाली । मैं तो उस दिन के लिए बैठा हूँ जब दुनिया के अर्थव्यवस्था की लगाम हिन्दी चीनी कम तीसरी दुनिया के देश के हाथ में हो । बुश की पार्टी जीते या डेमोक्रेट इससे अमेरिकी दादागिरी पर फर्क परने वाला नहीं । तो देखता हूँ आज से अपना भड़ास भी हिलेरी ओबामा और मैकेन रंग के असर पर कुछ करता है या चुप...................................

Sunday, 20 April 2008

आई पी एल

धूम मस्ती दीवानगी आदि आदि का मिश्रण है आई पी एल । ललित मोदी का दिमाग और सुभाष चन्द्रा द्वारा दी गई परोक्ष चुनौती ने बीसीसीआई को भी मुकाबले के लिए विवश किया। पैसे की चमक ने तमाम विदेशी खिलारिओं को आई पी एल में खेलने के लिए बाध्य किया चाहे इसके लिए उन्हें अपने देश के लिए बगावत भी क्योंना करना पड़े । पैसा जो न करे । भाई आज golblisation का दौड़ में आप किसी को बाँध कर नहीं रख सकते। कुछ बुढे पर गए खिलाड़ी जैसे मियांदाद टाइप लोग जिनको भारत की क्रिक्केतिया तरक्की फूटी आँख नहीं सुहा रही । मान लिया की आज कल भारत पाकिस्तान को पीट रहा है तो इसमें अपना क्या दोष है । २० २० की हार अभी तक नहीं भूले तो मत भूलो लेकिन उदई भारत से जलो मत और भी white टाइप लोगों। कुछ तो सोचो की आज का भारत जवान है और जवानों को रोकना ...... मतलब सोचलो। यदि भारत आई सी सी को हांकता है तो इसमे क्या गलती है । कहतें हैं की जल में रहकर मगर से बैर । सारा पैसा का अस्सी प्रतिशत विश्वा क्रिकेट को भारत से तो क्यों ना चले मेरा............

Friday, 7 March 2008

राय दे

मैं भड़ास के लेखकों से अनुरोध करता हूँ की वे अपना ध्यान उन नेताओं के करनी कथनी पर भी जरुर लगाएं जो जनता के नजर में अपने को बहुत बड़ा तारनहार के रूप में पेश करते हैं । पिछ्लें दिनों मैनें एक लेख भड़ास पर डाला था जिसमें नरेगा की कुछ खामिओं और हकीकत के बारे में बताया था । मैं चाहता हूँ की आप उन नेताओं का जरुर पर्दाफास करें जो इस रोजगार देने वाले कानून को सीढी बनाकर चुनावी बेरा को को पर लगना चाहते हैं। इक तो मजदूरों को अनिश्चित काम और उसको संचालित करने वाले कर्मिओं को ठेका की नौकरी । क्या यह चल सकता है। चाहे बिहार सरकार हो या केन्द्र सरकार इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकती की सौ दिन के काम से ही एक परिवार को गुजरा हो सकता है क्या ठेके के कर्मी इस योजना को क्योंकर सफल बानाने की कोसिस करें । अपेक्षित टिप्पणी ।

आपकी राय

मैं भड़ास के लेखकों से अनुरोध करता हूँ की वे अपना ध्यान उन नेताओं के करनी कथनी पर भी जरुर लगाएं जो जनता के नजर में अपने को बहुत बड़ा तारनहार के रूप में पेश करते हैं । पिछ्लें दिनों मैनें एक लेख भड़ास पर डाला था जिसमें नरेगा की कुछ खामिओं और हकीकत के बारे में बताया था । मैं चाहता हूँ की आप उन नेताओं का जरुर पर्दाफास करें जो इस रोजगार देने वाले कानून को सीढी बनाकर चुनावी बेरा को को पर लगना चाहते हैं। इक तो मजदूरों को अनिश्चित काम और उसको संचालित करने वाले कर्मिओं को ठेका की नौकरी । क्या यह चल सकता है। चाहे बिहार सरकार हो या केन्द्र सरकार इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकती की सौ दिन के काम से ही एक परिवार को गुजरा हो सकता है क्या ठेके के कर्मी इस योजना को क्योंकर सफल बानाने की कोसिस करें । अपेक्षित टिप्पणी ।

Thursday, 14 February 2008

मराथागिरी

बहुत हो गया राज भाई । आज शिवाजी होते तो सबसे पहले तुम्हें ही अपनी गुरेल्ला युद्ध का शिकार बानाते क्योंकि तुमने उस राष्ट्रवाद को मारना प्रारम्भ किया है जिसके लिए उन्होंने मुगलों के खिलाफ जान तक को दाव पर लगा दिया था । यदी तुम्हें मराठा मानुस की इतनी ही फिकर है तो क्यों नहीं विदर्भ के किसानों के लिए कुछ करते हो जो मरकर भी अपना कर्ज चुका नहीं पाते । जिस बिहारी कामगारों को तुम अपनी सस्ती लोकप्रियता के लिए बेरोजगार मराठी युवकों को अपनी सेना बनाकर पिटवा रहे हो उन सेनाओं को उन्हीं बिहारी लोगों से यह क्यों नहीं कहते सिखने को जो अपनी मेहनत की कमाई खाते हैं और इस देश के लिए connecting india का रियल रोल अदा करतें हैं। मुम्बई किसी की जागीर नहीं । पूरे देश की जान है। अच्छा होगा यदि सारे दल इस राज टाइप गुंडा गर्दी से और उसके चाचा सीनियर ठाकरे के मुह्फत बयानों पर लगाम लगाने के सार्थक कोशिश करें। सबसे सस्ती जान बिहारी लोगों की ही नहीं है जिसको जब जहाँ मन हुआ वहीं धो दिए।

Sunday, 6 January 2008

क्रिकेट

आज भले ही भारत हर गया हो लेकिन इस हर में आस्ट्रेलिया के ग्यारह खिलारी के अलावे दो एम्पायर भी साथ थे। बकनर को तो भारत के खिलाफ मैच में जैसे नशा ही चढ़ जाता है कि जो भी निर्णय देना है वह इंडिया के खिलाफ दूंगा । सचिन आउट नहीं है तो क्या मैं हूँ ना । बकौल बकनर । अरे कुछ भी कर लो भारतीय गेंदबाज बकनर आपके पक्ष में फैसला देने वाला नहीं। आस्ट्रेलिया को मैच जीतने पर जो पैसा मिलता है उसका बारहवां हिस्सा बकनर का भी बनता है। आस्ट्रेलिया को हराना है तो आपको बकनर जैसों से बचना होगा। क्या होता यदि सिमंड्स आउट होता पहली पारी में और आस्ट्रेलिया २०० के अन्दर पहली पारी में सिमट जाता और भारत को ३०० से अधिक रन की बढ़त मिलती । फिर दूसरी पारी को मिलाकर भी आस्ट्रेलिया नहीं जीतता । आज भारत टेस्ट मैच जीत जाता क्योंकि इसे लगभग १०० रन बनाना होता। खैर आगे जरुर इन्साफ होगा।

Wednesday, 24 October 2007

बिजली की आँख मिचौली

उर्जा मंत्री बिहार , के गगनभेदी आश्वाशन की, बेगुसराय में छात्रों के लिए शाम छः से दस बजे रात्री तक हर हाल में बिजली दी जायेगी किन्तु यह आश्वाशन दपोर्शंखी साबित हुआ।यह कैसी विडंबना है की जहाँ बिजली उत्पादन होता है उस जिले को बिजली का रोना रोना परता है । भले ही बेगुसराय के लोग तमाम आधुनिक सुविधाओं को जुटाने की क्षमता रखते हों , किन्तु उनका यह शौक बिन बिजली सब सुन रहता है। हमारे संसद जो सिर्फ वोट के यार हैं , काहे को ध्यान देंगे की काम से कम आधे दिन की भी बिजली बेगुसराय को मिले। शहर में बहुत सायबर कैफे हैं किन्तु सब बिजली का ही रोना रोते हैं । यहाँ की जनता को अब इंतजार छोर क्रांति की राह चुनना होगा क्योंकि इसके बिना कम नहीं होने वाला । ऐसा करना गलत भी नहीं होगा क्योंकि सारा आश्वासन फेल हो चुका है।